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कुछ इस तरह से तेंदुलकर ने दी ओणम की बधाई, जानिए क्यों मनाया जाता है ये त्योहार


मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने फैन्स को ओणम की शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर एक खास पोस्ट शेयर करके तेंदुलकर ने ओणम की बधाई दी है। तेंदुलकर ने दो तस्वीरें शेयर की हैं और एक खूबसूरत सा मेसेज भी लिखा है। सचिन के साथ उनका एक फैन है, जिसने अपने पैर से तेंदुलकर का स्केच बनाया है।

तेंदुलकर ने इस फैन के साथ फोटो शेयर करते हुए लिखा, 'सभी को ओणम की शुभकामनाएं! मैं उम्मीद करता हूं कि इस त्योहार के समय में सबके घर खुशी और समृद्धि आए। हाल ही में एक यात्रा के दौरान मैं प्रणव से मिला था। एक ऐसा आर्टिस्ट जो अपने पैरों से स्केच बनाता है। मैं उसे और उसके मोटिवेशन को देखकर हैरान रह गया। मेरे लिए ये स्पिरिट ऑफ केरला का एक उदाहरण है।'

क्यों मनाया जाता है ओणम
ओणम को असुर राजा महाबली के स्वागत में मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन महाबली पाताल लोक से धरती पर अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। मान्‍यता है कि राजा महाबली कश्‍यप ऋषि के पर पर पोते, हृणियाकश्‍यप के परपोते और महान विष्‍णु भक्‍त प्रह्लाद के पोते थे। वामन पुराण के अनुसार असुरों के राजा महाबली ने अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। राजा महाबली के आधिपत्‍य को देखकर इंद्र देवता घबराकर भगवान विष्‍णु के पास मदद मांगने पहुंचे। भगवान विष्‍णु ने वामन अवतार धारण किया और महाबली से भिक्षा मांगने पहुंच गए। वामन भगवान ने बलि से तीन पग भूमि मांगी। पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश को नाप लिया। अब तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं थी तो महाबली ने कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रख दें। भगवान वामन ने ऐसा ही किया। इस तरह महाबली के आधिपत्‍य में जो कुछ भी था वह देवताओं को वापस मिल गया। वहीं, भगवान वामन ने महाबली को वरदान दिया कि वो साल में एक बार अपनी प्रजा और राज्‍य से मिलने जा सकते हैं। महाबली के इसी आगमन को ओणम त्‍योहार के रूप में मनाया जाता है। मान्‍यता है कि महाबली हर साल ओणम के दौरान अपनी प्रजा से मिलने आते हैं और लोग उनका स्‍वागत करते हैं।

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